Monday, March 16, 2015

Remembering Februry , Google के डूडल का एना एटकिंस को सलाम

Today I will tell you one experience I had this February day.
It was the first week of February, to a beautiful day and we decided to go to Hisar via the road which has fields on both sides.When we arrived everything was great, looked the sun, the breeze and farms were   calm, (looked like a green carpet), had a blue sky, beautiful, rarely can see well, there were very few persons people, super clean sand on empty land, ie everything was perfect.
we stopped our car and got out into the roadside wheat field and were sitting   half hour or more, because the temperature was also perfect and no harsh sun, as soon as we reached Hisar near our house  and suddenly everything changed, in seconds, got up a hurricane blew chairs, umbrellas and sand also rose above our heads getting into the eyes, the sea was ruffled suddenly began to emerge that pool large waves had by sea, all that were there we looked scared and we even think of a tsunami, was chilling.
Strong, strong, tough about fifteen minutes, then slowed but we could not be there by the wind and sea conditions, the beach was empty we were going slowly, good hard bit. When we got home (I'm very close) and what happened we were told there had been no atmospheric change.
I assure you that an event like this had not ever lived that has force of nature against it no one can.

Then at home in night................ 




dinning was jam packed with week's purchases of food items 





 And after sleep……….. in the morning hours we enjoyed  mornings with pude
 remembering the previous day experiences.




I wish you a happy bridge abutment to everyone s!!

Google के डूडल.....................................................

मशहूर ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री और फोटोग्राफर एना ए‍टकिंस को सोमवार को उनके 216वें जन्मदिन पर गूगल ने डूडल के जरिए श्रद्धांजलि दी है। एना को फोटोग्राफ का इस्तेमाल कर पहली किताब प्रकाशित करने का श्रेय जाता है। जबकि उन्हें फोटोग्राफ बनाने वाली पहली महिला भी माना जाता है।
ए‍टकिंस वनस्पतिशास्त्र से जुड़ी तस्वीरें बनाने के लिए 'सन प्रिंटिंग' का इस्तेमाल करती थीं। उन्होंने 1843 में ऐसी ही तस्वीरों की एक किताब Photographs of British Algae: Cyanotype Impressions का प्रकाशन किया। एना फोटोग्राफ तैयार करने के लिए जिस तकनीक का इस्तेमाल करती थीं, उसे साइनोटाइप कहा जाता है। इसमें ब्लू बैकग्राउंड पर उजल तस्वीरें उकेरी जाती हैं। इस प्रक्रिया में पेपर को सूर्य की रोशनी में रखा जाता है, लिहाजा इसे सन प्रिंटिंग भी कहते हैं।
अपने करियर में एना ने सैकड़ों ऐसे नमूने इक्ट्ठा किए और 1865 में उन्होंने अपने पूरे कलेक्शन को ब्रिटिश म्यूजियम को दान कर दिया। दक्षि‍ण इंग्लैंड में 16 मार्च 1799 को जन्म लेने वाली एना के पिता भी विज्ञानी थें। एना का 9 जून 1871 को 72 साल की उम्र में निधन हो गया।



Tuesday, March 10, 2015

अटल पेंशन योजना

अटल पेंशन योजना



अटल पेंशन योजना

अटल पेंशन योजना (Atal Pension Yojana) नरेंद्र मोदी सरकार की विशेष असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा योजना है जिसकी घोषणा वित्तमंत्री अरूण जेटली ने 2015 के आम बजट में की. यह योजना एक जून से लागू होगी और पूर्ववर्ती सरकार की स्वावलंबन योजना एनपीएस लाईट की जगह लेगी.
इस योजना के अंशधारक 60 साल की आयु के बाद कम से 5000 रुपए मासिक पेंशन के हकदार होंगे. लोगों को इस योजना के प्रति आकर्षित करने के लिए सरकार ने अंशधारका के योगदान की 50 प्रतिशत राशि या 1000 रुपए प्रति साल का अंशदान जो भी कम हो अपनी तरफ से करने की घोषणा की है. यह अंशदान पांच साल के लिए 2015—16 से लेकर 2019—20 तक करेगी.
अब सवाल है कि स्वावलंबन योजना के मौजूदा अंशधारकों का क्या होगा? तो वे नयी योजना यानी अटल पेंशन योजना के लागू होने पर स्वत: ही उसमें विलय हो जाएंगे. हां अगर वे इससे हटना चाहते हैं तो यह उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा. इस योजना में 18 साल से 40 साल की आयु में ही जुड़ा जा सकता है और कम से कम 20 साल अंशदान करना जरूरी होगा.
सरकार के सहयोगी अंशदान का फायदा उन्हीं अंशधारकों को ​मिलेगा जो 31 दिसंबर 2015 तक इस योजना से जुड़ते हैं. इसके तहत 60 साल की बाद से अंशधारकों को 1000 रुपए से 5000 रुपए की पेंशन मिलेगी जो कि उनके अंशदान के अनुसार तय होगी.