Wednesday, March 20, 2024

डोमिनिक लापिएरे के कोलकाता से जुड़े कुछ अनछुए संस्मरण (Dominique's Heartwarming Memories)

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जब डोमिनिक लापिएरे इस किताब के लिए रिसर्च कर रहे थे, तो उनके जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटीं जिन्होंने उनका पूरा नजरिया बदल दिया:
  • स्लम में गुजारे कई साल: डोमिनिक कोई आम विदेशी पर्यटक नहीं थे। उन्होंने कोलकाता के उस बदनाम और बेहद गरीब स्लम में कई साल गुजारे। उन्होंने वहां के लोगों के साथ जमीन पर चटाई बिछाकर सोया, वहां का साधारण खाना खाया और मच्छरों व भयंकर गर्मी के बीच रहकर उनकी तकलीफों को महसूस किया।
  • कमाई का आधा हिस्सा दान: इस किताब से डोमिनिक लापिएरे को जो रॉयल्टी (पैसा) मिली, उसका ठीक आधा (50%) हिस्सा उन्होंने उसी स्लम के लोगों के उत्थान, बच्चों की शिक्षा और कुष्ठ रोगियों (Leprosy patients) के इलाज के लिए दान कर दिया। उन्होंने कोलकाता के स्लम के लिए कई चैरिटी फाउंडेशन भी शुरू किए।
  • "आनंद नगर" नाम क्यों पड़ा?: डोमिनिक अक्सर हैरान होते थे कि इतनी भयानक भुखमरी, बीमारी और तंग गलियों के बावजूद, वहां के लोगों के चेहरों पर हमेशा एक मुस्कान रहती थी। वे त्योहारों को पूरे उत्साह से मनाते थे और एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े रहते थे। इसी 'ह्यूमन स्पिरिट' (मानवीय जज्बे) को देखकर उन्होंने उस स्लम का नाम 'सिटी ऑफ जॉय' (Anand Nagar) रखा। उनका मानना था कि असली अमीर वह नहीं जिसके पास पैसा है, बल्कि वह है जो हर हाल में जीना जानता है।
XO

Saturday, March 9, 2024

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