Tuesday, June 29, 2021

A cozy afternoon and little bit crocheting,sundrying clothes


The coolness and soothing in weather due to yesterday’s rain didn’t last long and with my little grand daughter  off to her nanus(maternal grandfather) until evening there was only one thing to do…crochet little projects

I made three bookmarks to give one away to my daughter’s friend.This was really a fun and quick project to do during a comfortable weather and moments. Hoping these will spur reading of the owners.

My grand daughter earned the first one of the crocheted bookmark and another the fan shaped one, for taking it over to her friend, her family lives just 100 feet away to our house. She had her book mark the little one for drawing book which she needs frequently.



Previously when I made this one in self designed colour, my daughter came in from Delhi. She was so delighted for its beauty and of course it’s her authentic need too. She reads a lottttttttttttt. She is a writer.



She said “mummy you should be a professional crocheter, you would make lots of money (extra money from leisure activities).” Bless her, she’s serious. That is the magical thing about making little things for your children. It doesn’t matter if they are blurry, not perfect or little bit. Your children will always think your creations are the best.


I will rant about …may be in coming post about …..a growing epidemic that not many people are even aware about (as described by my librarian friend). As per my friend many…mannnnnnnnnnnnny of readers came in this library to read are not using proper bookmarks when reading book!!

Yes, I know that is very hard to believe but I myself have seen it with my own eyes. Some people leave behind the library receipt, doctor appointment slips, and papers with names/phone numbers on them, invitation cards, a blank check, photographs, even a candy wrapper.

Air drying cloths







तार पर या रेक पर धुले कपड़े सूखते देखना मेरा शगल है 
It's my pastime to watch washed clothes dry on a wire or on a rake

Sunday, June 27, 2021

Haryanvi cuisine


 


आजकल बेटा जब वॉलीवाल खेलने जाता है तो उसका एक दोस्त सबके लिए 

राबड़ी का कैम्फर भर कर लाता है जिसे वे सब पीते हैं बेटा हर बार मुझे यह बताता है मैंने कभी अपने घर पर राबड़ी बनाई नहीं मेरी दादी इसे रगर्मियों में रो ज बनाती थी मेरी मम्मी भी जब  गाँव में रहती थी तब इसे बनाती थी.मैंने सोचा क्यों न आज राबड़ी बनाने की विधि ब्लॉग में शेयर की जाए   

राबड़ी

राबड़ी हरियाणा और राजस्थान का मुख्य पेय है. इसे खाया और पीया भी कजाता है गाढ़ी राबड़ी को बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है जबकि छाछ मिली राबड़ी को पीया कजाता है। राबड़ी कोई बियर का नया ब्रांड नही है. ये एक अमृत है गर्मी से निजाद पाने के लिए. राबड़ी राजस्थान और हरयाणा का प्रमुख पेय है जो कि काफी लोकप्रिय और सस्ता भी है और स्थानीय रूप से आसानी से तैयार हो जाता है. राजस्थन में जहा 45-50 डिग्री तापमान रह्ता है वहां ये वरदान है. लू के थपेड़ों में भी लोग इसको पी कर दोपहर में आराम से सोते है. यह गरमी के मौसम में अधिक प्रयोग की जाती है. जो पहली बार राबड़ी पिएगा, एक गिलास मे बेहोश नींद में सो जाएगा. आजकल राबड़ी पाँच सितारा होटलों मे भी उपलब्ध है और विदेशी पर्यटक बड़े चाव से राबड़ी का लुत्फ उठा रहे है. इस राबडी के साथ बाजरे की रोटी चूर कर खा सकते हैं या ठंडी राबडी में छाछ या दही और जीरा मिलाकर पी सकते हैं.

राबड़ी के फायदे ही फायदे हैं:-

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यह तनाव कम कम करती है
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इससे नींद अच्छी आती है
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कभी लू नही लगती है
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ब्लड प्रेशर नही होता है
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अस्थमा में भी लाभदायक है
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भूक अच्छी लगती है
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पेट की हर बिमारी में लाभ दायक है 

राबड़ी बनाने की विधि

राबड़ी तीन प्रकार की होती है.

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खाटे की राबड़ी
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छाछ की राबड़ी
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कुटेड़ी राबड़ी 

खाटे की राबड़ी

यह राबड़ी बनाने के लिए २०० ग्राम बाजरे के आटे में ५० ग्राम मोठ का आटा मिलाएँ तथा लगभग २५० ग्राम छाछ में मिट्टी की हांडी में पाँच मिनट तक हाथ से फेंटें. इसमें लीटर हलका गुनगुना पानी मिलाएं. इस घोळ को दोपहर को धूप में रखें. साम बजे तक इसमें खमीर जाता है तब इसका पानी कपड़े से छानलें. नीचे जमा आटा अलग रख लें. निथारे पानी को आग पर चढा कर स्वाद के अनुसार नमक डालें. पानी जब उबलने लगे तब अलग रखे आटे को उबलते पानी में डाल कर लगभग - मिनट पकाएं और साथ साथ लकडी के चाटू से हिलाते रहें ताकि गठान पडें. इसमें दो-तीन उफान आजायें तब गाढ़ी होने पर उतार लें. यदि ज्यादा गाढ़ी हो जाए तो थोड़ा छाछ मिला लें . राबडी तैयार. अगर बाजरे का आटा या मोठ नही मिले तो गेंहू का आटा भी चल सकता है पर जो मजा बाजरे और मोठ के आटे की राबडी में है वो नही मिलेगा.

छाछ की राबड़ी

एक लीटर छाछ में लगभग २०० ग्राम बाजरे का आटा मिलाकर आग पर चढावें और धीरे धीरे लकड़ी के चाटू से हिलाते रहें. जब यह गाढी हो जाए और उफनने लगे तब नीचे उतार कर स्वाद के अनुसार नमक मिलावें. यदि गाढी ज्य्य्यादा हो जाए तो इसमें ठंडा छाछ और मिलावें. यह राबडी प्राय शर्दी के मौसम में खाई जाती है. साम को गरम गरम खाई जाती है और सुबह इसमे ठंडी में दही मिलाकर बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है.

कुटेड़ी राबडी

एक लीटर छाछ के लिए २०० ग्राम साबूत बाजरा भिगोयें. घंटे बाद चलनी से पानी निकाल कर ओखली में मूसल से बाजरा कूटें. कूटने से बाजरा जब सफ़ेद दिखने लगे और आधा फूट जाए तो एक लीटर छाछ में लगभग २०० ग्राम कूटे बाजरे को मिलाकर आग पर चढावें और धीरे धीरे लकड़ी के चाटू से हिलाते रहें. जब यह गाढी हो जाए और उफनने लगे तब नीचे उतार कर स्वाद के अनुसार नमक मिलावें. यदि गाढी ज्यादा हो जाए तो इसमें ठंडा छाछ और मिलावें. यह राबडी प्राय शर्दी के मौसम में खाई जाती है. साम को गरम गरम खाई जाती है और सुबह इसमे ठंडी में दही मिलाकर बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है. साम को गरम गरम खाई जाती है और सुबह इसमे ठंडी में दही मिलाकर बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है.


xoxo