Have nothing in your house that you do not know to be useful, or believe to be beautiful. - William Morris
Friday, January 30, 2026
महात्मा गांधी:
Sunday, January 25, 2026
Crochet Dreamz: How I Organize My Crochet Stuff
प्रकृति, प्रेम और मिनिएचर पेंटिंग्स: कालिदास की सुवास
क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पहले लिखी गई कविताएं आज भी हमारी आँखों के सामने एक जीवंत दृश्य कैसे बन जाती हैं?
जरा इन पंक्तियों को देखिए:
अमरान्थ (अमलतास या अमरता के प्रतीक फूल) की खिलती हुई डालियाँ, प्रियतम के चेहरे की वो बेमिसाल चमक, और प्रेम के तीखे बाणों से धड़कता हुआ एक भावुक दिल! ये पंक्तियाँ महाकवि कालिदास के क्लासिक ग्रंथ 'ऋतुसंहारम्' (Ritusamharam) की याद दिलाती हैं, जहाँ प्रकृति और मानवीय भावनाएं एक-दूसरे में सिमट जाती हैं।
Radha and Krishna Enjoying the Rain Jodhpur (Marwar) School, Rajasthan, National Museum, New Delhi This charming miniature
इन चित्रों का माहौल हमेशा बेहद अंतरंग और रूमानी होता है:
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संगमरमर की छत या बालकनी: जहाँ प्रेमी जोड़ा बैठा है।
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गहरी नजरें: वे एक-दूसरे की आँखों में खोए हुए हैं।
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मौसम का जादू: पृष्ठभूमि में प्रकृति अपने पूरे शबाब पर है—ठीक वैसी ही जैसी कालिदास की कविताओं में मिलती है।
यह इस बात का सबूत है कि भारत में कला और साहित्य कभी अलग नहीं रहे। जो बात कालिदास ने पाँचवीं शताब्दी में शब्दों से कही, उसी अमर प्रेम को 17वीं-18वीं सदी के चित्रकारों ने अपने ब्रश और रंगों से कैनवास पर उतार दिया। शब्दों की यह खुशबू सदियों बाद भी आज उतनी ही ताज़ा है!
xoxo
Our front yard is not very large, where the we the residents keep the plant in the corner,keep our scooter, motorcycle, keep some chairs and table to sit in the sun ,lay charpoy to dry our grainsetc.etc..
Yesterday cleaning my back yard and kitchen island the stand of the fridge and a big tub ended up being withdrawn from the list.
We took the fridge stand to place the tub with plants in it.
There they have been for many weeks.
ella's craft creations: A very proud Mum and Dad !!!
my next projects ...and some nostelgia
जब मैंने लंदन के ऐतिहासिक 'स्लम' (Slum) पर रिसर्च की: Dickens बनाम Arthur Morrison
- पृष्ठभूमि: यह कहानी 19वीं सदी के उत्तरार्ध में लंदन की टेम्स नदी के किनारे बसे 'वापिंग' (Wapping) इलाके की है। 'द होल इन द वॉल' असल में नदी किनारे स्थित एक पब (शराबखाना) है, जो अपराधियों और तस्करों का गढ़ है।
- कहानी का सार: कहानी 'स्टीफन' नाम के एक अनाथ बच्चे के नजरिए से आगे बढ़ती है, जो अपनी मां की मौत के बाद अपने दादाजी 'कैप्टन नैट' के पास रहने आता है। कैप्टन नैट ऊपर से भले दिखते हैं, लेकिन असल में चोरी का माल खरीदते हैं। एक मरे हुए जहाज मालिक का £800 का बैंक नोट कैप्टन नैट के हाथ लग जाता है, जिसके बाद पूरे इलाके के अपराधियों (क्रूर डैन ओगल और अंधे जासूस जॉर्ज) में लालच और हिंसा का खूनी खेल शुरू हो जाता है। अंत में पब में आग लग जाती है और कैप्टन नैट स्टीफन को बचाकर एक नई शुरुआत करते हैं।
- मुख्य संदेश: यह उपन्यास दिखाता है कि कैसे एक छोटे बच्चे का भोलापन एक बूढ़े अपराधी के भीतर छिपी अच्छाई को जगा देता है।
- पृष्ठभूमि: यह कहानी लंदन के ईस्ट एंड के सबसे कुख्यात स्लम 'The Old Jago' पर आधारित है, जो हकीकत में 'ओल्ड निकोल' (Old Nichol) नाम का झुग्गी इलाका था। यहाँ केवल भुखमरी, गैंगवार और अपराध का राज था।
- कहानी का सार: इसका नायक 'डिकी पेरॉट' (Dicky Perrott) नाम का एक समझदार लड़का है। वह पैदाइशी बुरा नहीं है, लेकिन जीवित रहने के लिए 'एरॉन वीच' नाम के चालाक दुकानदार के उकसावे में आकर चोर बन जाता है। स्थानीय पादरी 'फादर स्टर्ट' उसे सुधारने और नौकरी दिलाने की कोशिश करते हैं, लेकिन स्लम का दलदल उसे वापस खींच लेता है। डिकी के पिता एक हत्या के आरोप में फांसी पर लटक जाते हैं और अंत में, मात्र 17 साल की उम्र में डिकी एक हिंसक गैंगवार में चाकू लगने से सड़क पर दम तोड़ देता है।
- 2. टाइमलाइन का मोड़: डिकेंस बनाम मॉरिसन (Timeline Clash)रिसर्च के दौरान मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल यह आया कि "क्या मॉरिसन का यह लेखन चार्ल्स डिकेंस की स्लम रिसर्च से पहले का है या बाद का?"तथ्यों को खंगालने पर पता चला कि आर्थर मॉरिसन की किताबें चार्ल्स डिकेंस के दौर के बहुत बाद (After) की हैं:
- चार्ल्स डिकेंस (Charles Dickens): इन्होंने 19वीं सदी के मध्य (1830 से 1860 के दशक) में लिखा। उनका प्रसिद्ध स्लम उपन्यास 'Oliver Twist' 1838 में आया था।
- आर्थर मॉरिसन (Arthur Morrison): इन्होंने विक्टोरियन काल के बिल्कुल अंत (1890 के दशक) में लिखा। यानी डिकेंस के 'ओलिवर ट्विस्ट' के लगभग 58 साल बाद 'A Child of the Jago' प्रकाशित हुई थी।
3. Oliver Twist बनाम Dicky Perrott: एक ऐतिहासिक तुलनादोनों ही पात्र लंदन के बदनाम स्लम के छोटे लड़के हैं, लेकिन डिकेंस और मॉरिसन की विचारधारा में जमीन-आसमान का अंतर था:- जन्मजात अच्छाई बनाम माहौल का असर: डिकेंस का ओलिवर चोरों के बीच रहकर भी हमेशा एक फरिश्ते की तरह पवित्र बना रहता है, वह कभी स्वेच्छा से अपराध नहीं करता। वहीं, मॉरिसन का डिकी हालात और माहौल (Environment) के आगे घुटने टेक देता है और जीवित रहने के लिए चोरी को एक "हुनर" मानकर अपनाने लगता है।
- कहानी का अंत: ओलिवर की कहानी का अंत किसी फिल्मी परिकथा जैसा सुखद (Happy Ending) होता है, जहाँ एक अमीर मसीहा उसे गोद ले लेता है। इसके विपरीत, डिकी की जिंदगी में कोई चमत्कार नहीं होता और वह बेहद कम उम्र में हिंसा का शिकार होकर मर जाता है।
- लेखन की शैली: डिकेंस का नजरिया भावुक और आदर्शवादी (Sentimental) था, जबकि मॉरिसन का नजरिया कठोर यथार्थवाद (Naturalism) पर आधारित था, जो दिखाता है कि स्लम की दलदल से निकलना नामुमकिन है।
4. दोनों महान लेखकों की वास्तविक प्रेरणाएँ (Inspirations)अपनी रिसर्च के अंतिम चरण में मैंने यह जानने का प्रयास किया कि इन दोनों लेखकों को ये कहानियाँ लिखने की प्रेरणा कहाँ से मिली:💡 चार्ल्स डिकेंस की प्रेरणा (Oliver Twist के लिए):- खुद का बचपन: डिकेंस के पिता जब कर्ज के कारण जेल गए, तो 12 साल के चार्ल्स को अकेले एक पॉलिश फैक्ट्री में बाल-मजदूरी करनी पड़ी। वह दर्द ओलिवर के रूप में बाहर आया।
- क्रूर कानून (New Poor Law, 1834): सरकार ने गरीबों के लिए जेल जैसे 'Workhouses' बनाए थे, जहाँ बच्चों को भूखा रखा जाता था। इसी के विरोध में ओलिवर का प्रसिद्ध दृश्य लिखा गया—"Please, sir, I want some more."
- वास्तविक स्लम: डिकेंस ने एक पत्रकार के रूप में लंदन के अपराधी गढ़ 'Saffron Hill' और गंदे इलाके 'Jacob's Island' की खाक छानी थी।
💡 आर्थर मॉरिसन की प्रेरणा (A Child of the Jago के लिए):- 18 महीने की जमीनी रिसर्च: मॉरिसन ने किसी कल्पना का सहारा नहीं लिया। उन्होंने लंदन के सबसे खतरनाक स्लम 'Old Nichol' में जाकर पूरे 18 महीने गुजारे और खोजी पत्रकार की तरह आंकड़े जुटाए।
- पादरी ऑसबॉर्न जे (Osborne Jay): उस नरक जैसे स्लम में अकेले पादरी ऑसबॉर्न जे लोगों की जिंदगी सुधारने की जंग लड़ रहे थे। उपन्यास के 'फादर स्टर्ट' का चरित्र इन्हीं असली पादरी पर आधारित था, जिन्होंने खुद मॉरिसन को वहां की हकीकत दिखाई थी।
5. इस रिसर्च का सामाजिक प्रभाव: जब किताब ने इतिहास बदल दिया!इस रिसर्च का सबसे खूबसूरत हिस्सा वह था, जब मुझे पता चला कि मॉरिसन की किताब केवल एक उपन्यास बनकर नहीं रही। जब 'A Child of the Jago' छपी, तो ब्रिटिश समाज और आलोचकों में हड़कंप मच गया। अमीर समाज हैरान था कि उनकी नाक के नीचे ऐसा नरक बसता है।इस किताब के प्रभाव के कारण ब्रिटिश सरकार जागी। लंदन काउंटी काउंसिल ने उस पूरे 'Old Nichol' स्लम को जमींदोज (Demolish) कर दिया और वहां 'Boundary Estate' नाम की एक साफ-सुथरी कॉलोनी बनाई, जिसे दुनिया का पहला सरकारी सामाजिक आवास (Social Housing) प्रोजेक्ट माना जाता है!निष्कर्ष:
मेरी इस स्टडी से यह साफ हुआ कि जहाँ डिकेंस ने समाज को यह दिखाया कि गरीबों के प्रति दया रखनी चाहिए, वहीं मॉरिसन ने 58 साल बाद यह साबित किया कि स्लम को केवल दया से नहीं बदला जा सकता, बल्कि उस पूरे सिस्टम और माहौल को जड़ से उखाड़ना बेहद जरूरी है।आपको मेरी यह रिसर्च और इन दोनों किरदारों की तुलना कैसी लगी? कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरूर साझा करें!—बिमला आर्यxo
