Monday, December 16, 2013

मोहाली की एक यादगारी मिनी ब्रेक यात्रा 🌿🚗


दिनांक: 14 दिसंबर 2013

स्थान: मोहाली - चंडीगढ़

14 दिसंबर 2013 का दिन हमारे लिए एक बेहद खास और यादगार मिनी ब्रेक लेकर आया। मिनर्वा अकादमी, अमरूदों के लहलहाते बाग, शांत-सुंदर ग्रामीण दृश्य और कार की सुहानी सवारी—सब कुछ इस यात्रा को खास बना रहा था

भांजी का मिनर्वा अकादमी में कोर्स पूरा होने के बाद यह उसका वापसी का दौरा था। आइए, इन खूबसूरत तस्वीरों के माध्यम से इस सुहाने दिन की यादों को फिर से जीते हैं


मोहाली के रास्ते में एक छोटा सा ब्रेक। चारों तरफ फैली हरियाली के बीच कुछ पल रुककर हवा का आनंद लेते हुए

My niece joined and completed her course in minervaacademy
दूर तक फैले हरे-भरे खेत। खुले आसमान के नीचे प्रकृति के करीब होने का अनुभव ही अलग होता है



ताज़ी हवा और चारों तरफ फैली ख़ूबसूरत हरियाली

गाँव के कच्चे रास्ते पर खड़ी हमारी कार। पिछली बार जब हम आए थे, तब यहाँ यह हरा-भरा चारा नहीं उगा था


parked in the driveway there was a lash green fodder crop, that hadn't been there the last time we'd visited. 
मोहाली में मिनर्वा अकादमी के बाहर अपनी यात्रा के दौरान बिताए कुछ खुशनुमा लम्हे
It was her come back tour from Mohaly on that day  
बाग़ के माली की पत्नी ने बेहद सादगी से तौलकर हमें थैला भरकर ताज़े अमरूद दिए

फलों से लदे अमरूद के पेड़—देखने में जितने सुंदर, सेहत के लिए भी विटामिन-सी से भरपूर


अमरूदों के इस खूबसूरत बाग़ में बिताया गया एक शांत और ताज़गी भरा समय

माली ने बताया कि बीज से उगे अमरूद के पौधे में 4-5 सालों में फल आने लगते हैं। यहाँ 'फैन रतीफ' और 'मडेरा' प्रजातियों के फल अप्रैल से सितंबर तक खूब फलते हैं


A guava tree grows fast – grown from seed, it may produce a harvest in its fourth to fifth year.  In the garden we sport Fan Retief and Madeira varieties. Their white blossoms turn into an abundant  fruit supply from April all the way to September, said the gardener.
धूप खिली दोपहर में अमरूद के बाग़ की सैर का अपना ही मज़ा था
We really enjoyed a sunny garden filled day.
ताज़े तोड़े गए अमरुदों को हाथ में लिए चेहरे पर खिली मुस्कान। बेटी और भतीजा एक साथ इस पल का आनंद लेते हुए




December afternoon in MOhali 
वाकई, यह पूरा दिन अमरूदों के नाम ही रहा। मोहाली की एक ढलती हुई दिसंबर की दोपहर



पूरे बाग़ की ख़ूबसूरती एक तरफ, और मिट्टी के चूल्हे पर पकती हुई गरमा-गरम चाय की आत्मीयता एक तरफ! बेटी यहाँ माली की 12 साल की छोटी बेटी के साथ प्यार से बातें कर रही है



मोहाली से हिसार लौटते वक्त रास्ते में पीली सरसों से लहलहाते खेत
ईंधन भरवाने के बाद हम अपने शहर हिसार की ओर बढ़ चले। रास्ते में खेतों के किनारे तस्वीरें लेने का सिलसिला यूँ ही चलता रहा


आशा है कि आपको हमारी इस छोटी सी यात्रा की झलकियाँ और तस्वीरें पसंद आई होंगी!


Until then - Bon Weekend!

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