भर जाता है। दुनिया के 103 देशों के पाठकों ने मेरे विचारों को पढ़ा है और आज मेरे ब्लॉग पर 161 झंडे (flags)
इकट्ठा हो चुके हैं।
इनमें कुछ ऐसे भी अज्ञात (Unknown) और सैटेलाइट से जुड़े पाठक हैं जिनकी सटीक लोकेशन
तो एक रहस्य है, पर उनके व्यूज यह बताते हैं कि शब्द सीमाओं और तकनीकों को लांघकर दूर-दूर तक पहुंच जाते हैं।
आज शाम की एक घटना ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया। आज से ठीक तीन घंटे पहले, वियतनाम के
खूबसूरत और ऐतिहासिक शहर हनोई (Hanoi) से एक पाठक ने मेरे ब्लॉग पर आकर मेरा एक पुराना लेख पढ़ा।
यह लेख साल 2018 में 'Woman's Era' मैगजीन में "Shopping Bedsheets ..Gracious sryle" शीर्षक से छपा था,
जिसे मैंने स्कैन करके अपने ब्लॉग पर साझा किया था।
![]() | ||
| double click for larger view |
![]() |
| double click for larger view |
बेड लिनेन, थ्रेड-काउंट और फैब्रिक्स की बारीकियों पर आधारित इस लेख को जब आज तीन घंटे पहले हनोई में
बैठकर किसी ने पढ़ा, तो मैं गहरी सोच में पड़ गई। जब मैं अपनी ही इस पुरानी लिखी बात को दोबारा पढ़ने लगी,
तो खुद का ही मूल्यांकन (evaluate) करने बैठ गई। मैं सोचने लगी कि समय के साथ मेरे लेखन और विचारों की
यात्रा ने कितने पड़ाव तय किए हैं।
अपनी ही पुरानी पोस्ट को पढ़ना, खुद को बीते हुए पन्नों में तलाशना और दुनिया
भर के अनजान लोगों से इस माध्यम से जुड़ना, मेरे लिए अब एक खूबसूरत सांध्यकालीन साधना बन गया है।
मेरे शब्दों को स्नेह देने के लिए हनोई के उस अनजान पाठक और दुनिया भर के सभी पाठकों का हृदय से आभार। 🙏✍️
xoxo


