My another post on roties is HERE
Have nothing in your house that you do not know to be useful, or believe to be beautiful. - William Morris
Monday, March 7, 2016
I am in WE
My another post on roties is HERE
Sunday, March 6, 2016
Me made doll.
Project Doll!
xoxo
Friday, March 4, 2016
Friday rain, and reblog
NDAY, JULY 7, 2013
I curled-up in my couch after a strain day's work, and had a nap. Soon there was thunder storm with lots of sand and other materials fallowed by rain, it called a stop to my nap................and isit in front of my computer with a cup of tea...it happend with the following post on rain and i blogged it here.........
Saturday Rain
Happy Rainy Day!
some posts are too cool to reblog again!again!!!!!and again !!!!!!!!!!!
Reduce Reuse and Recycle
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| plastic bags of sugar, grout, white cement, plaster of paris i made plarn out of these then braided them into a big braid! |
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| Hereis the link for this rainy mat i made out of the braid and |
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| I unravel the mat wrapped the braid over two paint tins for plant pots |
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| braided plant pot in the varandah |
again we people bored with the looks of the plant pots and up-cycled them
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| Up-cycled braids on the floor in the sun so that they become soft to coil into the mats |
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| third time i made three table mats out of that very plarn braid. |
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| the second place mat |
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| the third place mat xoxo |
Thursday, March 3, 2016
The tradition of ear studs/Bujalis (traditional Haryanvi Jewelrycgn bbvg)
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| though in this picture silver bujlis and nose purli are of silver metal xoxo |
मेरा सिलाई का हुनर!
मैंने जब से होश संभाला है मैं अपने कपड़े स्वयं सिलाई करती आई हूँ, जहाँ तक सिलाई सीखनेका सवाल है, मैंने छठी में गृह-विज्ञान विषय लिया था. मेरे बावजी की बीच स्त्र में आगरापोस्टिंग हुई थी और आगरा किसी भी स्कूल में दाखिला ना मिलने पर मैंने तोशम स्कूल मेंदाखिला लिया और छठी कक्षा के कोई 4-5 महीने मैंने वहाँ सिलाई सीखी थी, उसमें सिलाई सेज्यादा कढ़ाई एव्म खानादारी ही ज्यादा थी. मुझे याद है मैं बाकी लड़कियों से बहुत छोटी थी,उस समय मैक्रेम के पर्स बनाने का बहुत रिवाज था, वह मुझे इतना कठिन लगता था कि कभीउसपर हाथ आजमाने की कोशिस मैंने नहीं की. हाँ मोती पीरो कर एक बैग मैंने जरूर बनायाथा जो मैक्रेम की आसान गाँठ से बनाया था।
बाद में मैंने यह विधा सीखी और अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर, बेटे को पालने की गरज सेजब कुछ 2-3 वर्ष घर में रही तब यह बैग जो मुश्किल (मुझे उस समय लगती थी) नोट में बनाया गया है,और यह पर्स जो यहाँ ऊपर दिखाया गया है आसान नोट (जिस नोट से मैने छठी कक्षा मैं बैग बनाया था)
फिर से सिलाई की बात...
फिर मैंने सातवीं और आठवीं कक्षा में आगरा में भी कुछ सिलाई सीखी थी.
इसके बाद प्रेप में एफ सी कालेज में सीखी, और गृह विज्ञान विषय से ग्रेजुएशन करते वक्त भीकुछ सीखी.
सबसे बड़ी बात...
छठी कक्षा से मैंने अपने द्वारा सिले कपड़े ही पहने ...इसके साथ-साथ अपनि दोनों बहानों छोटेहोते तक मेरे दोनों भाइयों के कपड़े अपने बच्चों के कपड़े, अपनी बहनों के बच्चों के कपड़े,भाइयों के बच्चों के (बीच-बीच में)....फिर जब मैं अपनी यह विधा मैग्जिनो में भेजने लगी और...प्रकाशित होने लगी तो इसमें अधिक नीखार आया.
बड़ा अच्छा लगता है अपनी विधा प्रकाशित होती है और अन्य लोग सीखते हैं...सराहते हैं....
नीचे मेरी बिटिया के मेरे सिले कुछ सलवार सूट एव्म चूड़ीदार सूट प्रस्तुत है.....नीचे मेजंटा सूट जिन्हें दो चुन्नियों के साथ टीम किया है ..यह फूलो वाली चुन्नी जो पहले मेरी मम्मी की साडी थी जिससे मैने पटियाला सलवार और मैचिंग प्लेन कमीज से टीम कर यह चुन्नी ल़ी थी...यह नानी की साडी की चुन्नी बिटिया पर सजी है......क्या बात है तीन पीढ़ियों का एक ही परिधान! है ना यादगार सुनहरे लम्हे!
यह नीले चूडीदार नीले सूट की चुन्नी का कपड़ा दुबई से मेरी सहेली सुरेन्द्र लेकर आई थी बिटिया ने सलवार के कपड़े की चुन्नी बनवा ल़ी और इतना कपड़ा था कि कमीज के कपड़े से यह चूडीदार सूट बन गया!...
| khadi suit |
| khadi suit |
और यह ऊपर दिखाए कुछ सूट जो मैने जयपुर से खरीदे थे खादी के यह सूट जिन्हें मैने पी एच डी (मैने राजस्थान यनिवर्सिटी, जयपुरसे पी एच डी की थी ) जयपुर करते समय बार-बार के जयपुर के दौरों के वक्त बापू नगर मार्केट से खरीदे थे इन सुतो की सिलाई मैं मुझे कोई मशक्कत नहीं करनी पड़ी यह चुन्नी के साथ मैच करते सूट खुद में एक मिसाल हैं ......हैं ना खुबस्सुरत! लाजवाब!
यह नीचे संत्री रंग के सूट के साथ फ़िर से मम्मी की साड़ी से बने मेरे पटियाला सलवार सूट की चुन्नी जो बिटिया ने आपने इस सूट के साथ मैच की है....यह हल्का नीला चूडीदार सूट .....सफेद चुन्नी के साथ...
नीचे गुलाबी सूट कि जालीदार चुन्नी भी कभी मेरे सूट के साथ की है, जिसे बिटिया ने पसंद नहीं किया था पर यहाँ मेरे लिये जरुर मोडलिंग कर दी थी....
सच मैं मेरे बचे मेरे हुनर के शिकार रहे हैं!
शब्बा खैर!
Friday, February 5, 2016
Tuesday Views
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Golden hour views through the windshield. सफर, ढलता सूरज
और खूबसूरत रास्ते। |
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When industry meets the beauty of nature.चिमनियों के बीच से
छनकर आती ढलते सूरज
की सुनहरी किरणें। |
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| An incredible silhouette against the evening sky सूरज की रोशनी और धुएं का यह अनोखा नजारा। |
Chasing the setting sun on the way back home.कार की खिड़की
से झांकता सुनहरा शाम का सूरज।
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A peaceful evening drive wrapped in warm twilight.घर वापसी
का सफर और ढलती
शाम की खूबसूरती. |
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The last rays of daylight filtering through the trees. खेतों और पेड़ों के
पीछे से मुस्कुराता सूरज। |
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Catching the fiery sun right before it
disappears.शाम की यह लालिमा
और शांत राहें। |
I was in the car, so the sun and I stuck together
I’m a huge fan of beautiful sunset and sunrise pictures



























