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Thursday, December 8, 2011

up-cycling.: उनके चित्रों ने स्त्री की आजादी को नए मायने दिए...and some me made things...



The process of is very dear to me, so much so that i created a lot of up-cycled articles which is the need of the day during recession. I also love the idea of taking old things and making them into new.its a trait transfer d by my Dad, he was a man who lead the frugal life....इ am on his foot steps and trying to transfer the trait to my kids...now adults.

some empty tins some forged twines ....and the result is here


i utilized all the waste that was lying with me with last few months only...
i will write the HOW of them all....and very soon!

here are some leaves i created in assortment with colours ...

Gogi Saroj Pal -


मेरी बेटी मशहूर पेंटर और अपनी दोस्त गोगी सरोज्पाल के साथ...उनके पेंटिंग एग्जिविसन स्थल

my daughter's article on her Famous Artist friend....just click and be acquainted with her...

.: उनके चित्रों ने स्त्री की आजादी को नए मायने दिए: प्रसिद्ध चित्रकार गोगी सरोज पाल ने कैनवास पर रूप-रंगों के सहारे एक नया मुहावरा विकसित किया. उनकी चित्रकला और जीवन पर विपिन चौधरी का आ...

Monday, October 24, 2011

Wreath (रैथ)

घास की रैथ
मैंने कुछ दिन पहले मैंने अपने सामने के दरवाजे पर टांगने  के लिए एक रैथ बनाई. रैथ का चलन 16 वीं शताब्दी में मार्टिन लूथर के सुधारवाद  के समय जर्मनी में हुआ जब गाड़ी के पहिये के साथ बच्चों को क्रिश्मिस के बारे में समझाया जाता था. रैथ एक गोल लच्छा होता है जिसे विभिन्न तरीकों से सजाया जाता है और इसे सामने के दरवाजे को सजाने के लिए टांगा जाता है.  




मैंने इसे कैसे बनाया:
कुछ दिन पहले हमारे सामने के पार्क में घास की कटाई हुई थी. और वह सूखने के बाद ढेरों इधर-उधर बिखरी पड़ी थी. एक दिन सुबह पार्क के ट्रैक पर सैर करते वक्त मेरी नजर सुखी घास के ढेर पर अटक गई और मैंने इसका कुछ उपयोग करने की सोची और मैं  जितनी एक बार में उठा सकती थी उठाई और घर ले आई कुछ 4-5 दिन बाद शाम को सामने के बरामदे में बैठ मैंने अपनी मम्मी की सहायता से घास का घेरा बनाया. इसके लिए मैंने फिर से बची-खुची बेकार चीजों का इस्तेमाल किया. प्रेशर कुकर की गैस्कैट पर बेकार पानी की ट्यूब लपेट कर उस पर घास लगाना शुरू किया और उसे गेहूँ की बोरी उधेङ प्राप्त की गई रस्सी लपेटी इस प्रकार घास का एक गोल चक्कर बनाया और उस पर सजावट की इसे बनाने का पूरा तारीका में अगली पोस्ट में विस्तार से पोस्ट करूँगी.
शब्बा खैर!