क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों पहले लिखी गई कविताएं आज भी हमारी आँखों के सामने एक जीवंत दृश्य कैसे बन जाती हैं?
जरा इन पंक्तियों को देखिए:
अमरान्थ (अमलतास या अमरता के प्रतीक फूल) की खिलती हुई डालियाँ, प्रियतम के चेहरे की वो बेमिसाल चमक, और प्रेम के तीखे बाणों से धड़कता हुआ एक भावुक दिल! ये पंक्तियाँ महाकवि कालिदास के क्लासिक ग्रंथ 'ऋतुसंहारम्' (Ritusamharam) की याद दिलाती हैं, जहाँ प्रकृति और मानवीय भावनाएं एक-दूसरे में सिमट जाती हैं।
Radha and Krishna Enjoying the Rain Jodhpur (Marwar) School, Rajasthan, National Museum, New Delhi This charming miniature
इन चित्रों का माहौल हमेशा बेहद अंतरंग और रूमानी होता है:
·
संगमरमर की छत या बालकनी: जहाँ प्रेमी जोड़ा बैठा है।
·
गहरी नजरें: वे एक-दूसरे की आँखों में खोए हुए हैं।
·
मौसम का जादू: पृष्ठभूमि में प्रकृति अपने पूरे शबाब पर है—ठीक वैसी ही जैसी कालिदास की कविताओं में मिलती है।
यह इस बात का सबूत है कि भारत में कला और साहित्य कभी अलग नहीं रहे। जो बात कालिदास ने पाँचवीं शताब्दी में शब्दों से कही, उसी अमर प्रेम को 17वीं-18वीं सदी के चित्रकारों ने अपने ब्रश और रंगों से कैनवास पर उतार दिया। शब्दों की यह खुशबू सदियों बाद भी आज उतनी ही ताज़ा है!
xoxo
No comments:
Post a Comment