Monday, February 6, 2012

Mom



दोस्त, माँ, राज़दा , प्यार  वह सब कुछ हैं मेरे लिए और हर काम में माहिर हैं। उनके साथ रहने पर मुझे खुद को बदलने या छोटा महसूस करने की ज़रूरत नहीं पड़ती; मैं जैसी हूँ वैसी ही रह सकती हूँ, बच्चों की तरह हरकतें कर सकती हूँ, खेल-कूद सकती हूँ और आराम से समय बिता सकती हूँ।मेरा कोई राज़ ऐसा नहीं जो उनसे छिपाऊं सिर्फ वे और  वे ही हैं जिन्हें मैं सब कुछ बता सकती हूँ अपने बहन- भाइयों, बच्चों- जिस  किसी की भी  बात अच्छी ना लगे मैं उन्हें बता सकती हूँ 

Mom at work




जो लोग उन्हें नहीं जानते, उन्हें बता दूँ कि उनमें ज़िंदगी को भरपूर जीने का ज़बरदस्त जोश है। वह हैं सावित्री देवी और मेरी आने वाली किताब "मैं : ऐसी क्यों हूँ " की हीरो भी वही हैं।

अगर आप अपनी ज़िंदगी अपनी शर्तों पर जीना चाहें, तो ज़िंदगी बहुत आसान हो सकती है। वह इसकी एक सच्ची मिसाल और ट्रेंड-सेटर हैं। संयुक्त परिवार में सास-ससुर देवरों-देवरानियों,ननदों के साथ उनका तालमेल गज़ब का था. खली रहना उन्हें पसंद नहीं वह हरदम कुछ-कुछ करती रहती हैं अब वे 75 वर्ष की हैं लेकिन काम वे 60 वर्ष की महिलाओं जैसा कर  लेती हैं 

वह अपनी ज़िंदगी को अपने तरीके से जीती हैं और बिना किसी शर्त के प्यार करती हैं। जब किसी को लगता है कि उन्हें मदद की ज़रूरत है, तब वह दूसरों की खूब मदद करती हैं।


My inspiration today


xoxo

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