देखिए यह सुंदर ब्लैक एंड व्हाइट सलवार सूट.
देखिये यह सलवार सूट....
| Its me in black and white ramond's fabric suit |
और अब इस कुर्सी पर टंगे शानदार पर्स को देखिए....

यह सुंदर बैग मैंने अपने एक पुराने पर्स को उधेड़ कर बनाया है. इसमें पुराने पर्स के सभी हार्डवेयर (बकल, कुंडे और बटन) का दोबारा इस्तेमाल किया गया है. इस तरह नए सूट के बचे हुए कपड़े से मैच करता हुआ यह शानदार बैग बनकर तैयार हो गया.
सूट भी नया और बैग भी नया, वह भी खुद के हाथों से बनाया हुआ. इसे पहनकर एक अलग ही खुशी मिलती है.
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| ब्लैक एंड व्हाइट का यह क्लासिक कॉम्बिनेशन और खुद का डिज़ाइन किया हुआ यह मैचिंग बैग वाकई बहुत खूबसूरत लगता है. |
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| जब हुनर और शौक एक साथ मिल जाएं. पुराने पर्स के हार्डवेयर और नए सूट के बचे कपड़े से बना यह खूबसूरत मैचिंग बैग. |
जब हुनर और शौक एक साथ मिल जाएं, तो ऐसी ही सुंदर चीजें आकार लेती हैं. पुराने बैग के सामान और नए सूट के बचे कपड़े के तालमेल से बना यह अनोखा मैचिंग बैग मेरे पसंदीदा क्रिएशन में से एक है.
डायरी: 5 सितंबर 2013 की एक और याद - गुदड़े (discarded clothing quilts)और रेत की सोंधी महक
आज पार्क में कुछ बातें सुनकर बचपन की एक बहुत प्यारी याद ताजा हो गई. चर्चा चल रही थी 'गुदड़ों' की (बचे हुए कपड़ों से बनने वाले गद्दे या बिछौने).
पार्क में बातें हो रही थीं कि ए भाण/बेबे-गुदड़े तो रेत में सुखाए हुए ही अच्छे लाग्या करदे . रेतमैं सूखे पाछै जमाए फोके-फोके (हल्के और फूले हुए) हो जाया करदे, अर उन पर इतणी मिट्ठी नींद आया करदी, अर, जै उनन्नै सीधे तार पर सुखा देंदे , तो वे सूख कीं इस्से करड़े हो जांदे जमा लाकड़ बरगे अर उन पर पाणी के पीले दाग न्यारे दिखण लाग जांदे(भाई/बहन, गुदड़े (गद्दे/बिस्तर) तो रेत में सुखाए हुए ही अच्छे लगा करते थे। रेत में सूखने के बाद वे बिल्कुल हल्के और फूले हुए हो जाया करते थे, और उन पर इतनी मीठी नींद आया करती थी। और, अगर उन्हें सीधे तार पर सुखा देते, तो वे सूखकर ऐसे कड़े (सख्त) हो जाते जैसे बिल्कुल लकड़ी हो और उन पर पानी के पीले दाग अलग से दिखाई देने लग जाते थे।
यह सब सुनकर मुझे अपनी दादीजी की याद आ गई. बचपन में जब मैं जोहड़ (तालाब) के पास मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे ढेर (गुमड़े से) देखती थी, तो मैंने अपनी दादी से कौतूहलवश पूछा था, "दादी, ये क्या हैं?"
दादी हंसकर बोली थीं, "बेटी, यहाँ कपड़े सुखा रखे हैं. दामन और गुदड़े जैसे मोटे कपड़े, जो सामान्य तौर पर हवा में बहुत देर से सूखते हैं, उन्हें कपड़े में बांधकर रेत में दबा दिया जाता है. रेत उनकी सारी नमी को चूस लेती है. इस तरह रेत में सुखाए गए ये कपड़े हवा में सुखाए गए कपड़ों से भी ज्यादा साफ, सुथरे और खुशबूदार हो जाते हैं."
आज पार्क में वही पारंपरिक ज्ञान और बचपन की यादें फिर से आंखों के सामने तैर गईं.
XOXO


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