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Sunday, December 16, 2012

हरियाणा की माटी से उठती सशक्तीकरण की नई गूंज




हरियाणा की माटी में जहाँ श्रम की सुगंध है, वहीं अब वहाँ रूढ़ियों को बदलने का संकल्प भी है. इंडिया टुडे का यह लेख हमें याद दिलाता है कि जब एक ग्रामीण महिला अपने चेहरे से पर्दा हटाती है, तो वह केवल अपना चेहरा नहीं दिखाती, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नया रास्ता रोशन करती है.

इस प्रेरणादायक बदलाव की पूरी कहानी और सामाजिक शोध को विस्तार से पढ़ने के लिए नीचे दी गई पीडीएफ (PDF) फाइल को डाउनलोड करें या मूल लेख के लिंक पर जाएं.

मूल लेख का लिंक: यहाँ क्लिक करें

शब्बा खैर!




Wednesday, October 12, 2011

my daughter's writtings,confessions!!!


बड़े दिनों से मैं अपने ब्लॉग पर नहीं  सकी.
कारण?
कंप्यूटर पर का करने की एक दिक्कत है कि खराब होने पर इसकी दवा स्वँय नहीं की जा सकतीऔर एमरजेंसी में उसे डॉक्टर के यहाँ दाखिल करवाना पड़ता है और मेरे पास भी कोई चारा नहीं थामैंने अपने कंप्यूटर को उसके इलाज के लिए हॉस्पिटल में जमा करवा दिया और फिर मेरे घर को सँवारने का सिलसिला जो शुरू हुआ कि में उसे भूल ही गई बस सीमेंटगाराबजरीपेंट ...धूल....कंकड़भयानक शोर.....और मिस्त्रीप्लम्बरपेंटर बस उनकी तो बात ही मत पूछो एक बार घर में घुस गए तो बस ....घर से निकलने का नाम ही नहीं लेते........
बहरहा मेरा कंप्यूटर भी घर  चुका है और मैंने अपने घर की पुताई भी इसी शनिवार को करवा कर इस काम से निजात पा ली हैशायद कुछ छूट-पुट काम रह गया हैवह हमारे "हेंडिमैनके हाथों करवा लूँगी.
आज कुछ  जो मेरी बेटी ने लिखा.....कुछ 2-3 वर्ष पहले जब सोनिया लड़की केलीफोर्निया में अपनी पढ़ाई के दौरान सहायता के लिए हमारे यहाँ आई थी उसके बारे में हैसोनिया अमेरिका में रहती है और जब वह जापान में अँगरेजी पढाती थीउसने कैलिफोर्निया से पत्रकारिता में कोर्स करने की ठानीजब वह जापान से अमेरिका जा रही थी तो उसने अँगरेजी अखबार में मेरी भानजी द्वारा शोध किया लेख पढ़ाजिसमें हरियाणा में महिलाओं के घटते लिंगानुपात का जिक्र था तब उसने अपने पत्रकारिता के एक प्रोजक्ट में इस विषय पर काम करने की ठानी और उसने समय आने पर मेरी भानजी को खोज निकाला और हमसे पूछ-ताछ की हमने उसे बखूबी वेल्कम किया और उसने अपना काम बखूबी दक्षता से निभा लियासोरखी गांव जाकर केरल से ब्याह कर लाईं गई लड़कियों से पूछ-ताछ की और केरल उनके घर जाकर भी अपनी लघु फ़िल्म का कुछ हिस्सा शूट किया.
बेटी को किसी बात पर उसकी अपने काम की जिजीविषा की बात की याद  गई साथ ही अमेरिका में पढाई का  स्तर  भी पता चला क्योंकि उसे उसी काम की त्रुटियों (गाईड द्वारा निकली गई)को दूर करने के लिए दोबारा भारत उसी हरियाणा के गांव आना पड़ा और उसने अखबार में इस बारे में लिखा जो नीचे दिया जा रहा है.
अगली पोस्ट में उसकी फ़िल्म भी अटैच करूँगी.
देखिये यह लिंक !!


I want to share some pics of park while walking in the evening




ladies are reciting devotional songs in the evening .....this is a routine work for them.

शुभ दिवस!!