Have nothing in your house that you do not know to be useful, or believe to be beautiful. - William Morris
Monday, August 30, 2021
Happy Janmaashtami
यूएसए के बोस्टन का वो पेड़ जहां श्रील् प्रभुपाद खड़े होकर भगवत गीता पर उपदेश देते थे और कीर्तन करते थे। इस पेड़ का नाम उनकी याद में हरे कृष्णा ट्री रखा गया। आज भी इस्कॉन के भक्त इस पेड़ को देखने जाते हैं
A._C._Bhaktivedanta_Swami_Prabhupada
Founder and Acharya of the International_Society_for_Krishna_Consciousness (ISKCON)
Krishna’s Messiah: ISKCON Founder, Srila Prabhupada's 125th
Birth Anniversary
The Government of India will release a commemorative coin of
the value Rs 125 in the honour of the founding Acarya of ISKCON. A booklet on
the contributions and achievements of Srila Prabhupada will be featured with
each coin in a commemorative box. The coin will be composed of silver and
copper
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
XOXO
Janmashtami
Dahi Handi (curd pot)
One of the spectacles of the celebration is Dahi Handi, an event that narrates the story of young Krishna as Makhanchor. Handi or an earthen pot is filled with white butter, ghee, dry fruits, and milk. It is then hung with ropes at some height from the ground. As people gather around it to witness the moment, the young boys in the locality would form a human pyramid, climb up to the Handi and break it.
xoxo
Sunday, August 29, 2021
ऊन के टुकड़े + सुखी टहनीयां = गुलदस्ता
यहाँ पर आपके ड्राइंग- रूम की मेज
की सजावट के लिए एक बहुत ही सुन्दर तरीका बताया जा रहा है. आपके ड्राइंग रुम को सजाने
के लिए एक बेहतरीन तरीका है यह. आप रंगीन धागे अथवा ऊन को कुछ टहनियों पर लपेट कर उन्हें किसी फूलदान में
डाल कर रख सकती हैं.
मैंने अपनी कुछ बची-खुची ऊन ली और
उन्हें टहनियों पर लपेट दिया और टहनियों को टेरा-कोटा के इस गुलदस्ते में डाल दिया.
आप भी बनाइये कुछ ऊन के टुकड़े
और सुखी टहनियों को लेकर, ऊन को टहनी के निचले हिस्से पर बाँध दें फिर उसे
टहनी पर लपेटती जाएँ, हो गई ऊन-टहनी की कलाकृती तैयार और लुटिये वाह-वाही
आपने मेहमानों,रिश्तेदारों से!
गर्मियों में घर को सजाने का इससे आसान तरीका और क्या होगा?
पेड़- पौधों की सुखी डंडियों पर रंगीन ऊन लपेट कर, ढेर सारी रंगीन डंडियों को किसी भी फूलदान या टेरा-कोटा के बर्तन में खोंस दें,फिर देखें आपके कमरे का कोना कितना रंगीन हो खिल उठेगा.
कल उस उन के टुकड़ों का ढेर देख मेरे मन में एक ख्याल आया कि इन टुकड़ों का मैं जरूर कोई-न- कोई उपयोग करूंगी शाम को घर की बगिया में मेरी नजर कुछ सुखी टहनियों पर पड़ी जो पौधों की काट-छंट के बाद सूखने के लिए रखी थीं कि कहीं पर इनका उपयोग करूंगी.
झट से ध्यान आया कि इन टहनियों पर उन रंगीन ऊन के टुकड़ों को लपेट कर इन्हें रंगीन बनाउंगी. देखिये निचे की तस्वीर में इन रंगीन ऊन की टहनियों को, कैसी खूबसूरत लग रही हैं!
आप भी बनाइये ऊन की टहनियों का गुलदस्ता वो भी बेकार पड़ी न काम आने वाली चीजों का उपयोग कर, इस से आप घर सजावट के पैसों में बचत करेंगी और साथ ही पर्यावरणवीद हो जाएंगी! जी हाँ! क्या आप जानती हैं कि यह कचरा बाहर ना फैंक कर आप धरती पर कूड़े के ढेर को कम करेंगी चाहे आपका यह प्रयास समुन्द्र में एक बूंद भी क्यों न हो. इसका अच्छा असर
ज़रूर पड़ेगा.
इस गुलदस्ते के लिए आपको जरूरत है :
कुछ सूखी टहनियाँ/शाखाएं ( आकार और संख्या आपके फूलदान या अन्य बर्तन के आकार के अनुसार)
रंगीन ऊन के टुकड़े, गोंद , और कैंची .
आप को दिखाई नहीं पड़ रहा होगा कि मैंने एक ही रंग की ऊन के टुकड़ों को भी गाँठ बाँध कर जोड़ रखा है. यह छोटे- छोटे उभार लपेटे हुए सुन्दर लग रहे हैं. मैंने 4-6 इंच के टुकड़ों को भी जोड़ रखा है.
टहनी पर नीचे से ऊन लपेटते समय आपको गोंद लगाने की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए ऊन के सिरे को ऊपर कर दो-तीन बार लपेटिये और फिर ऊपर की तरफ लपेटते जाईये ऊपरी छोर पर ऊन को टहनी से गोंद की सहायता से चिपकाएं और ऊन तोड़ दें.
एक टहनी को दो-तीन रंगों की ऊन से लपेटते समय, पहले एक रंग की ऊन को ३-४ इंच तक लपेट लें फिर दूसरे रंग की ऊन के किनारे को टहनी के ऊपर की तरफ पकड़ कर पहली ऊन के किनारे को भी दबा लें और ऊपर की और ऊन लपेटती जाएँ। इसी तरह तीसरा और चौथा रंग टहनी पर लपेटें.
अब इन टहनियों को इनके आकार के अनुसार छोटे या बड़े किसी भी कांच, टेरा -कोटा या लकड़ी के फूलदान में डाल कर मेज या कमरे के कोने में रखें आपका कमरा खिल उठेगा.



















