Monday, October 18, 2010

मेरी हस्तकला, एक पुरानी गुड़िया और हाइपरबोलिक स्पेस का अनोखा संयोग


नमस्ते दोस्तों,

आज मैं आपके साथ अपनी एक बहुत पुरानी और खास याद साझा कर रही हूं। यह गुड़िया मैंने सन 1979 में बनाई थी।

सन 1979 में मैक्रैम तार और क्रोशिया से बुनी गई पोशाक में सजी गुड़िया.


इस गुड़िया की पोशाक मैंने क्रोशिया से मैक्रैम के तार का उपयोग करके बुनी थी। तस्वीरों में शायद आपको थोड़ी धूल दिखाई दे रही होगी, जिसके लिए मैं क्षमा चाहती हूं। हिसार एक शुष्क क्षेत्र (एरिड ज़ोन) है और हमारा घर मुख्य सड़क पर स्थित है, इसलिए घर में निरंतर धूल आती रहती है।

घर की मेज और फ्रिज के ऊपर जग के पास रखी गुड़िया की एक सुंदर झलक.


यह सुंदर पोशाक बनाकर मैंने गुड़िया को इसमें फिट कर दिया था। समय के साथ गुड़िया बदलती रही, और इस पोशाक में यह शायद चौथी गुड़िया है।

क्रोशिया से तैयार 'हाइपरबोलिक सरफेस' जैसा अनूठा और लहरदार घेरा.


एक दिलचस्प गणितीय संयोग!

हाल ही में जब मैंने इसके बारे में इंटरनेट पर खोज की, तो मुझे एक बहुत ही रोचक बात पता चली। इस पोशाक के निचले घेरे की सतह को गणित की भाषा में 'हाइपरबोलिक सरफेस' (Hyperbolic Surface) कहा जाता है।

गणित के इतिहास में सन् 1997 में कॉरनेल यूनिवर्सिटी की गणितज्ञ डाइना ताईमिना (Daina Taimina) ने पहली बार यह सिद्ध किया था कि क्रोशिया बुनाई (Crochet) के माध्यम से हाइपरबोलिक स्पेस का भौतिक मॉडल बनाया जा सकता है, जिससे इस अनूठी ज्यामिति को स्पर्श करके समझा जा सके।

कंप्यूटर टेबल पर रखी गुड़िया, जहाँ इंटरनेट पर मुझे इस ज्यामिति का पता चला.

"In 1997, Cornell University mathematician Daina Taimina finally worked out how to make a physical model of hyperbolic space that allows us to feel, and to tactilely explore, the properties of this unique geometry. The method she used was crochet."

कितना अद्भुत संयोग है कि बिना किसी गणितीय फॉर्मूले के, केवल अपनी रचनात्मकता और कला के बल पर मैंने 1979 में ही यह स्वयं का डिज़ाइन तैयार कर लिया था

घर के अलग-अलग कोनों में मेरी गुड़िया:

  • कंप्यूटर टेबल पर: कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठी मेरी नन्हीं गुड़िया।
  • फ्रीज के ऊपर: जग के पास सजाकर रखी हुई गुड़िया।इसे घर के किसी भी कोने में रख दीजिए, यह हर जगह अपनी सुंदरता बिखेरती है।

आगे किसी ब्लॉग पोस्ट में मैं आपको 'हाइपरबोलिक स्पेस' के बारे में और भी विस्तार से बताऊंगी।

आशा है आपको मेरी यह पुरानी याद और कलात्मक प्रयास पसंद आया होगा।

नमस्कार...







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