आंखों के लिए उपयोगी: सत्यानाशी का पौधा
कल मैं मम्मी के साथ बाहर धूप में बैठी थी। मम्मी ने देखा कि मेरी आंखें बार-बार झपक रही हैं। उन्होंने बताया कि उनकी दादी (जिनका जन्म लगभग 1880 के आसपास हुआ होगा), जब भी परिवार में किसी की आंख में दर्द होता, तो सत्यानाशी के पौधे का दूध आंख में डाल दिया करती थीं।
| सत्यानाशी का पौधा |
विलुप्त हो गई जड़ी-बूटियां
http://www.chauthiduniya.com/2010/12/bilupt-ho-gayi-jadi-butiyaan.html
मैंने तुरंत कंप्यूटर ऑन करके सत्यानाशी का पौधा गूगल किया। फोटो देखते ही मुझे याद आ गया कि हमारे खेतों और बाड़ों की मेड़ों (डोलों) पर यह पौधा खूब उगा करता था।
इंटरनेट पर खोजते समय मुझे इस पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां भी मिलीं।
विलुप्त होती जड़ी-बूटियां
एक समाचार लेख के अनुसार, हमारी कई पारंपरिक औषधीय वनस्पतियां अब आसानी से नहीं मिलतीं। उदाहरण के लिए:
पुनर्नवा: आंतों की समस्याओं और मुंह के छालों में लाभकारी यह पौधा अब दुर्लभ होता जा रहा है।
सत्यानाशी: आंख के रोगों के अलावा इसका दूध दाद-खाज और त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोग होता था, जो अब कम ही दिखाई देता है।
गोरखमुंडी व अमरबेल: खेतों में अपने आप उगने वाली गोरखमुंडी और पीलिया की कारगर दवा मानी जाने वाली अमरबेल (आकाशबेल) को भी हम सहेज नहीं पाए।
मकोई (रसभरी) व वनकवाच: हर जगह मिलने वाली मकोई और पारंपरिक प्रयोगों में आने वाली वनकवाच की जड़ जैसी औषधियां भी अब बीते दिनों की बात बनती जा रही हैं।
विकिपीडिया पर इसे 'भटकटैया' नाम से भी संदर्भित किया गया है।
यह देखकर आश्चर्य और गर्व होता है कि बिना पढ़े-लिखे भी हमारी दादी-नानी के पास इन घरेलू नुस्खों का कितना बड़ा खजाना था, जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से पहुंचता रहा। आवश्यकता इस बात की है कि इस पारंपरिक लोक-ज्ञान को हम लिखकर सहेजें और इसके वैज्ञानिक महत्व को समझें।
(चिकित्सकीय सावधानी: सत्यानाशी का पौधा (Argemone mexicana) विषैला भी हो सकता है। इसके दूध या तेल का सीधा आंखों में उपयोग बिना योग्य आयुर्वेदाचार्य या डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल नहीं करना चाहिए।)
विकी पीडिया में इसका भटकटिया बताया गया है..
No comments:
Post a Comment