आज दशहरा है दशहरे के दिन बहुत से लोग ह्मारे सामने के पार्क में लगे जांडी के पेड़ की पूजा कर रहे थे.मुझे हमारे खेत में लगे जांडी के पेड़ की याद आ गई। ........ मैंने उन्हें बताया आज मैंने बताया हमारेखेत में बहुत से जांडी के (खेजड़ी,Prosopis cineraria) के पेड़ थे. खेत में काम करते समय विश्राम करने के लिए हमपास वाली जांडी के नीचे ही बैठते थे। खेत में खाना भी इसी के नीचे बैठ कर खाते थे, सुबह घर से जब हम खाना लाते थे तब उसे कपड़े में बाँध कर जांडी (खेजड़ी) के पेड़ पर लटका देते थे ताकि चींटियों और जानवरों से हमारेखाने का बचाव हो सके.जांडी का पेड़ जेठ के महीने में भी हरा रहता है। हमारा इलाका बारानी पड़ता था अब तो खैर नहर भी आ गई है।
जांडी वृक्ष की धार्मिक महत्त्व और पौराणिक मान्यताये
शमी शमयते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी ।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी ॥
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया ।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता ॥
धार्मिक मान्यताओं में जांडी का वृक्ष बड़ा ही मंगलकारी माना गया है जांडी के वृक्ष पर कई देवताओं का वास माना गया है दशहरे पर जांडी के वृक्ष के पूजन का विशेष महत्व है ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका पर आक्रमण करने से पहले जांडी के वृक्ष के सम्मुख अपनी विजय के लिए प्रार्थना की थी रावण दहन के बाद घर लौटते समय जांडी के पत्ते लूट कर लाने की प्रथा आज भी है इसकी पत्तियां 'स्वर्ण 'का प्रतीक मानी जाती है नवरात्र के दिनों में मां दुर्गा का पूजन जांडी वृक्ष के पत्तों से करने का शास्त्रों में विधान है नवरात्र के नौ दिनों में प्रतिदिन शाम के समय वृक्ष का पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है महाभारत में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के अंतिम वर्ष में गांडीव धनुष इसी पेड़ में छुपाए जाने के उल्लेख मिलते हैं गणेश जी और शनिदेव दोनों को ही जांडी बहुत प्रिय है। जांडी के पेड़ की पूजा करने से शनि देव और भगवान गणेश दोनों की ही कृपा प्राप्त की जा सकती है एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को जांडी के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी इस पौधे में भगवान शिव स्वयं वास करते हैं जो गणेश जी के पिता और शनिदेव के गुरू हैं इसलिए भगवान गणेश की आराधना में जांडी के वृक्ष की पत्तियों को अर्पित किया जाता है जांडी पत्र के उपाय करने से घर-परिवार से अशांति को दूर भगाया जा सकता है ऋग्वेद के अनुसार जांडी के पेड़ में आग पैदा करने कि क्षमता होती है ऋग्वेद की ही एक कथा के अनुसार आदिम काल में सबसे पहली बार मनुष्य ने जांडी और पीपल की टहनियों को रगड़ कर ही आग पैदा की थी क्योंकि जांडी में प्राकृतिक तौर पर अग्नि तत्व की प्रचुरता होती है इसलिए यज्ञ में अग्नि को प्रज्जवलित करने हेतु जांडी की लकड़ी के विभिन्न उपकरणों का निर्माण किया जाता है जांडी वृक्ष की लकड़ी को यज्ञ की वेदी के लिए पवित्र माना जाता है शनिवार को करने वाले यज्ञ में जांडी की लकड़ी से बनी वेदी का विशेष महत्व है जांडी या खेजड़ी के वृक्ष की लकड़ी यज्ञ की समिधा के लिए पवित्र मानी जाती है वसन्त ऋतु में समिधा के लिए जांडी की लकड़ी का प्रावधान किया गया है जांडी के पेड़ को शास्त्रों में 'वह्निवृक्ष' भी कहा जाता है
xoxo
























