Sunday, July 22, 2012

यादों का निजी साहित्य: अमृतसर की एक झलक

एल्डस हक्सले ने सच ही कहा था"Every man's memory is his private literature." (हर व्यक्ति की स्मृति उसका अपना निजी साहित्य होती है).

आज पुरानी तस्वीरों के पन्नों को पलटते हुए दिल अचानक अमृतसर की उन खूबसूरत और अनमोल यादों में खो गया. कुछ यात्राएं सिर्फ घूमने के लिए नहीं होतीं, वे आपके भीतर हमेशा के लिए ठहर जाती हैं.

आस्था और सुकून का केंद्र: श्री हरमंदिर साहिब

तस्वीर में चमकता हुआ गोल्डन टेम्पल का वह पूर्वी छोर का दृश्य आज भी आंखों के सामने जीवंत हो उठता है. पवित्र सरोवर के शांत पानी में दिखता स्वर्ण मंदिर का अक्स और हवा में तैरती गुरबाणी की गूंज, मन को एक असीम सुकून और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है.

वाघा बॉर्डर का जोश

यात्रा का दूसरा पहलू था वाघा बॉर्डर का वह अद्भुत नजारा. वहां की हवा में घुली देशभक्ति, दर्शकों का उत्साह और जवानों का शानदार शौर्य देखकर हर किसी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. वह ऊर्जा आज भी इन तस्वीरों को देखकर महसूस की जा सकती है.





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अपनों का साथ

और इन सब खूबसूरत यादों के बीच, सबसे अनमोल हैं वे पल जो अपनों के साथ बिताए गए. सीढ़ियों पर मुस्कुराती हुई भांजियों (nieces) की यह तस्वीर याद दिलाती है कि सफर चाहे कितना भी शानदार हो, अपनों की हंसी ही उसे मुकम्मल बनाती है.

यादें वक्त के साथ धुंधली नहीं होतीं, बल्कि एक ऐसी किताब बन जाती हैं जिसे हम जब चाहें खोलकर पढ़ सकते हैं और उस बीते हुए वक्त को दोबारा जी सकते हैं. सच में, ये तस्वीरें मेरी उस निजी किताब के सबसे खूबसूरत पन्ने हैं.

क्या आपके पास भी ऐसी कोई यात्रा की याद है जो आपके दिल के बेहद करीब है? कमेंट में जरूर साझा करें.


Happy Day

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